पर यह तो बताइये कि ….इससे फ़ायदा ही क्या होगा ?
अरे भाई, मैं तो आज डरते डरते आया था कि कहीं कोई नाराज़ न बैठा हो, कि आप तो अच्छे गायब हो गये अचपन जी ? तो, मैं क्या ज़वाब दूँगा ? लेकिन यहाँ सब ठीकठाक ही लग रहा है । और फिर नाराज़ तो मुझे होना चाहिये था, बताओ क्यों ?
क्योंकि अबतक केवल, हाँ जी हाँ केवल 6 ईमेल मुझे मिले हैं, जिसमें दो जनों ने अपना ब्लाग बनाना चाहा है, बाकी चार जन ने तो इतने सवाल.. इतने सवाल.. इतने सवाल पूछे हैं कि समझो कि हद खतम हो गयी । लेकिन मैं नाराज़ नहीं हूँ, मुझको को उनका ज़वाब देना ही था सो दे दिया, और उनको हिन्दी में लिखने के आसान रास्ते बताये जा रहे हैं । देखना 5 – 6 वीक में ही तुमको उनका अपना और अपना ब्लाग दिखने लगेगा । यहाँ आरकुट , इन्डिया-राक्स, बिगअड्डा, पाजी, टैग्ड या हाई 5 जैसी बात थोड़े ही है कि आईडी बनाने के बाद इनको इनवाइट करो उसको बुलाओ, फिर जाकर बात बने । फिर मैं तो मदद कर ही रहा हूँ । वैसे मैं एक बात से नाराज़ हूँ कि तुमलोग वहाँ पर जल्दबाजी के चलते एक नयी इंगलिश ले आये हो, अब तुम्हीं देखो ‘ i nvr knw dat ritin hin vth ma kebo ws so ezy ‘ भई मेरा तो सिर चकरा रहा है, जैसे तैसे इसका मतलब निकलता है कि, आई नेवर न्यू दैट राइटिंग हिन्दी विथ माई कीबोर्ड वाज सो ईज़ी, भला यह कौन सी इंगलिश है ? हिन्दी से भागे तो सही, लेकिन इतनी टेलिग्राफिक इंगलिश भी तुम्हारे बड़े होने पर किस काम आयेगी ? मैं तो परेशान हूँ !![]()
मन में यही चल रहा है, ना कि यह बड़ा मुश्किल है ? ब्लाग बनायें कि नहीं, इससे क्या फ़ायदा ?
अरे बच्चों..ऽ ऽ, क्या तुमने भी बच्चों वाली बात पूछी है ! अपने लिये न सही, तुम मदर्स डे, फादर्स डॆ, फ़्रेन्डशिप डे या अपने बर्थ डे पर ही एक ब्लाग बनाओ, तुमको लगेगा कि अचपन ने भी कोई चीज बतायी थी । घर में अगर इंटरनेट है, तब तो बिना एक पैसा भी खर्च किये तुम्हारे पास एक शानदार चीज होगी । अगर तुम्हारा कोई दोस्त अकड़ता है, तो ब्लाग कर दो ।
अच्छा चलो, मैं सोच साच कर इसके कुछ फायदे बताता हूँ, तुम बस गिनते जाओ..
एक - यह अपना नक्शा हाई करने का सबसे सस्ता और जोरदार चीज है, इंटरनेट पर अपना एक सजा सजाया पन्ना !
दो - इससे तुम पूरी दुनिया में अपनी भाषा जानने वालों से, दोस्ती कर सकोगे और अपनी बातें कह सकोगे । एग्रीड ?
तीन - तुमको अपनी बातें ठीक तरह से लिखने का ढंग आ जायेगा । तुम भी देखोगे कि दूसरे कैसे लिखते हैं । है ना ?
चार - इससे थोड़ी मौज मस्ती के लिये हल्की फुल्की भाईगिरी भी कर सकते हो, ब्लाग करने वालों से लोग डरते भी हैं
पाँच - जितना तुम सोच सकते हो, उससे कुछ ज्यादा ही तुमको यहाँ पर आसानी से टूल्स और कई चीजें मिल जाती हैं,वाह !
छः - चाहो तो यहाँ अपना कोई और नाम भी रख सकते हो, जो तुम लिखोगे वह तो लोग पढ़ ही लेंगे ।अजी, काम बन गया !![]()
सात - कुछ दिन में ही तुमको बहुत से लोग जानने लगते हैं, और तुम्हारे कुछ लिखने का इंतज़ार भी करते रहते हैं। हुँह, VIP !
आठ - तुम्हारे बड़े ( मैं नहीं, भाई ) समझते हैं कि तुम कुछ अच्छा सोच ही नहीं सकते । इसलिये जो वह सोचते हैं, तुम वही करो । जो वह पढ़ाते हैं, तुम वही पढ़ो…मतलब सबकुछ उनकी ही मरज़ी का ! ब्लाग पर तो तुम अपनी मरज़ी चला सकते हो
नौ - यानि कि नाइन, तुमको यह लगने लगता है कि दुनिया में और इंटरनेट पर तुम्हारी अपनी भी कोई जगह है, सिर्फ़ अपनी !
दस - अब इसके बाद बस ! तुम माँ से कुछ कहना चाहते हो, डाँट खा गये, "चलो डिस्टर्ब मत करो" ऎसा बोल दिया । पापा के पास तो समय ही नहीं रहता । दोस्त मज़ाक उड़ायेंगे । क्या करें, किससे शेयर करें कि मैडम अपनी कालोनी वाले बच्चों को तो मार्क्स लुटाती हैं, और तुमको एक एक नम्बर चूस चूस कर देती हैं । तुमको कभी कभी डर भी लगता होगा कि आज वह सीनियर तुमको फिर छेड़ेगा … या कम्प्यूटर वाले सर आज फिर पीछे से आकर यहाँ वहाँ छू छू कर कुछ हरकत करेंगे ।
फिजिकल वाले सर छुट्टी के बाद भी तुमको स्टाफ़रूम में बुला कर बदतमीज़ी करेंगे । दीदी, चावला अंकल की गोद में बैठ कर देर तक पता नहीं चुपचाप क्या सुनती रहती हैं, बस शरमा शरमा कर हँसना ही दिखता है । तुमको कक्कड़ आंटी वाली स्वाती बहुत प्यारी लगती है, लेकिन बात करने की हिम्मत नहीं होती । वह बड़े स्कूल में पढ़ती है, और बहुत तेजी से अंग्रेजी में बातें करती है । प्यारी सी है तो क्या हुआ, तुम उ्सके नक्शेबाजी के बारे में, दीदी के बारे में , गंदे से ड्राइवर अंकल के बारे में, पापा के पार्टी से झूमते हुये लौट कर घर में हंगामा करने के बारे में, हमेशा बीमार रहने वाली मम्मी के बारे में..
अरे बाबा, कहाँ तक बताऊँ ? बस यह समझ लो कि किसी भी चीज को लेकर तुम लिख सकते हो । कोई ज़रूरी थोड़ी ना है कि यहाँ स्टोरी एंड पोयम्स ही लि्खी जायें । वह लिख सको तो बहुत ही अच्छा है, नहीं तो कोई बात नहीं । बस कुछ लिखो
"अचपन जी, आपतो अपने देश की भाषा की बात करते करते हिन्दी में लिखने को कहते हो, क्यों ?" वह इसलिये कि यह कोई ज़रूरी है कि ड्राइवर अंकल, दूधवाला या चावला अंकल इतनी अंग्रेज़ी जानते ही हों कि तुमने जो लिखा है, वह पढ़ ही लें । फिर तुम्हारे लिखने का फायदा ? मज़ा तो तब आये , जब अचानक लोग पढ़ें कि उनके बारे में, अपने बारे में, स्वाती के बारे में तुमने क्या क्या लिखा है । और हाँ, यह कनफ़ेशन करके अपने बोझ को हल्का करने की बहुत ही बढ़िया जगह है । OK ?![]()
बस, मुझे इंतज़ार है कि दो तीन मेल और आ जाये तो मैं स्टेप बाई स्टेप तुमको सबकुछ सिखा दूँ, हिन्दी भी ! जय हिंद !
अरे हाँ ! यह जितने भी इमेज़ यहाँ देख रहे हो, वह मेरे अपने नहीं हैं । यह सभी इंटरनेट से ही लिये गये हैं । अब तो तुमको समझ आ गया कि अपने ब्लाग को सजाना कितना आसान है । अगर और कुछ जानना हो तो, मुझे लिखना, Bye !
| Print article | This entry was posted by अचपन जी on June 4, 2008 at 11:47 pm, and is filed under ब्लाग के फ़ायदे. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |



about 3 years ago
हमें तो भई कन्फेशन बॉक्स बहुत जमा और तीनों बंदर सही एवं सार्थक ब्लॉगिंग की तरफ इशारा कर रहे हैं..मगर आप अप्पन जी, समझो तब न!!
-यह स्वाति कौन है? बहुत गहरे भाव उखड़ कर निकल आये गुरु…मन्ने तो ऐसा ही लागे है. :) सही फंसे.
about 3 years ago
:)
रोचक !
पर ये बेचारी आयशा टाकिया को क्यों दौड़ा रहे है।
थक गई तो ब्लॉग भी नही बनाएगी।
about 3 years ago
@ममता को
माँ कसम, नहीं जानता था कि यह आईशा टकिआ ही है।
आजकल रोज़ तो दर्ज़नों के हिसाब से तारिकायें आ रही हैं, किस किस का नाम रटता रहूँ ।
दस जगह भटकने से अच्छा कि अपनी पंडिताइन में रमे रहो, सो वहीं रमा हुआ हूँ ।
घाट निहारने में घर से भी जाऊँ,
मैं उस नस्ल का नहीं हूँ , ममता !