आज 3 जनवरी है… कोई नई बात… नहीं ?

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रुको जरा, मैं बताता हूँ । यह जो तुम अपने ड्राइंग-रूम में टँगी हुई घड़ी देख रहे हो.. और तन्मय जी, अपने हाथ पर बाँधें घूम रहे हैं…. यह डिज़िटल घड़ी आज के ही दिन लांच हुई  थी ! यह जानकारी मुझको रिशी जी ने अभी अभी दी है ! मैंनें तो सोचा, कि यह हाँक रहें हैं.. फिर नेट पर देखा तो यह सच ही बोल रहे हैं ! हुआ यह कि..

  
पुराने दौर में मैनुयल घड़ी को चालू रखने व सही समय देखने के लिये चौबीस घंटे में एक बार चाभी भरना बहुत ही ज़रूरी रहता था । इन घड़ियों की सबसे बड़ी प्रोब्लेम यह थी कि तुम एक बार भी चाभी भरना भूले नहीं कि तुम्हारा टाइम मैनेज़मेन्ट गड़बड़ाना तय !

इस समस्या का समाधान किया हैमिल्टन इलेक्ट्रिक आब्सोलेट नाम के कम्पनी ने । इसी कम्पनी ने दुनिया की पहली इलेक्ट्रानिक घड़ी लांच की थी । पता है.. बैटरी से चलने वाली इस घड़ी को बनाने में पूरे दस साल लग गये थे । इसे बनाने के प्रयास 1946  में शुरू कर दिया गया था, पर यह लांच हो पायी 3 जनवरी 1957  को । हैमिल्टन की यह घड़ी आधुनिकता की परिचायक मानी गयी ! लोग इसके पीछे पागल हो उठे । इसका केस भी काफी शानदार था, जिसने लोगों को बहुत आकर्षित किया । रिशी जी  ऎसी जानकारियाँ ला लाकर तुमको देते रहेंगे, इसलिये सारा का सारा थैंक-यू उनको ही देना !