पिंगपिंग की अनोखी सहेली
हुआ यह कि एक दिन जया की शैतानियों पर मुझे प्यार आ गया, ” देखो तो छटँकी कैसी हरकतें कर रही है ? ” निखिल को मौज़ आ गयी, ” छटँकी क्यों कहा, अँकल ?” मैं उनको इस विषय पर शह नहीं देना चाहता था, सो टाल गया, ” देखो फ़िफ़्थ में पहुँच गयी, और अभी भी इत्ती सी है !” लेकिन आज उसका जैसे दिन ही ख़राब था । जिसको कि तुम बच्चा-पार्टी कहते हो कि, ” आज तो मेरा लक ही ख़राब है । ” मैंने चिढ़ाया ! यह सुनते ही परम विद्वान, महाज्ञानी चुगलखोर महाराज श्री वैभव जी तुरँत लपक पड़े,
” औः और.. और क्या, ठीक तो कहते हैं, अचपन जी । लक वक कुच्छ नहीं होता है । मम्मी दूध का गिलास लिये इसके पीछे पीछॆ घूमती रहती हैं, तब जाकर यह दूध पीती है । औः औह… उसमें से भी इत्ता सारा दूध मेरे गिलास में डाल देती है । ” मैंनें अपना ढेर सारा मुँह लटका कर कहा, ” यह गलत बात है, जया । इससे तो तुम इत्ती की इत्ती रह जाओगी । ताकत के किये और बढ़ने के लिये तो यह सब ज़रूरी है, न भाई ? ” अब तो वैभव गुरु जैसे मेरे सेनापति बन गये, ” मेरी कुर्सी के हत्थे पर सवार होकर मेरा मुँह अपनी ओर ज़बरन खींच खींच और सारे भेद उगलने लगे,
” अचपन जी.. अचपन जी.. ऎई अचपन जी सुनिये तो… यह, यह ग्रीन वाली सब्ज़ियाँ.. अरे, वो हरी वेजिटेबुल, हाँ यह तो वह भी नहीं खाती है, जो एक बार आपने हम सब को विडियो दिखला कर बताया था ! एप्पल भी नहीं ! ” कहती है कि, कम्पलान तो पीती हूँ । मैंनें उछलने का एक्सन किया, “ भाई कम्पलान तो बहुत बड़ा धोखा है । उससे कुछ भी ख़ास नहीं होता । निखिल ने कहा, जो बात आप जानते हैं, वह सरकार भी तो जानती होगी, फिर बिकता क्यों है ? मैं उनको समझाने के लिये कुछ अच्छा सोच ही रहा था कि, वैभव जी का धैर्य चुक गया । अचपन जी, जया ने तो कल सारा पालक छिपा कर गमले में फेंक दिया था । और और औः मुझको मारने का प्लान बना रही थी । बड़ी मुसीबत है, भाई .. अगर अभी जया को डाँट पिलाता हूँ, तो इन श्रीमान चुगलखोर जी का हौसला बढ़ता है । और कुछ न कहता हूँ तो जया का नुकसान हो सकता है । किसी दूसरी तरह से इन बच्चों को यह सब समझाना पड़ेगा ।
एकदम से एक बात सूझी, मैंने कहा ठीक है.. तुम लोग जो मन हो करो,मेरा
क्या ? तुम खुद ही पिंगपिंग जैसी हो जाओगी, अगर चाहो तो पैन्क्रातोवा जैसी भी बन सकती हो । निखिल महाशय अकेले ही गेंद को टप्पा खिलाने में मस्त थे, एकदम से गेंद छोड़ छाड़ कर दौड़े हुये आये, ” कौन है यह पिंगपिंग.. अँकल ? और वो अभी जो एक नाम और भी ले रहे थे.. तोवा-कोवा जैसा कुछ करके, वह कौन है ? “ बता दूँगा.. बाद में बता दूँगा । उनका ज़वाब तैयार था, ” क्यों.. बाद में क्यों ? आप भूल गये तो.. आप ही तो कहते हैं कि, अपनी जी० के० बढ़ाने वाली जानकारी लेने में देर नहीं करनी चाहिये.. फिर बाद में क्यों ? ” आज बहुत दिनों बाद तुम फिर फँसे, अचपन ! बच्चों की दोस्ती जी का ज़ँज़ाल !
अच्छा तो पहले उस कोने वाली टेबुल से मेरा एल्बम तो उठाओ, और सबसे ऊपर के तीन पन्नों पर लगे फोटो देखो ! यह फोटो अभी पिछले ही वर्ष तो, यानि 16 सितम्बर 2008 को लँदन में खींचे गये थे । ![]()
इतने देर बार जाकर जया जी का बोल फूटा, “अरे… ये कौन हैं, इनके फोटो क्यों खींचे गये, अँकल ? ” पिंगपिंग मँगोलिया में रहते हैं और दुनिया में सबसे कम लम्बाई के आदमी हैं । यह सिर्फ़ 2 फ़ीट 5 इंच के हैं । निखिल बीच में बोले,” मुझे सेन्टीमीटर में बताइये ।” सेन्टीमीटर में 74.61 से. मी. होता है । निखिल ने शाम को फोन करके मुझे बताया कि, 74.61 से. मी. 2 फ़ीट 5.37 इंच होता है । खुश हैं कि, मेरी एक गलती उनके हाथ लग ही गयी ।
और यह लड़की दुनिया की सबसे लम्बी टाँगों वाली औरत है । यह रूस में रहती है, और इसका नाम है स्वेतलाना पैनक्रातोवा । जरा देखो, सिर्फ़ इसके टाँगों की लम्बाई ही पूरे 4 फ़ीट 4 इंच यानि 132 से.मी. है । यह सब देख सुन कर भी बच्चों को सँतोष न हुआ । जया ने मुझे फिर याद दिलाया कि, ” मगर यह तो आपने बताया ही नहीं कि, इनकी फोटो क्यों खींचीं गयी है ? ”
सच्ची, यह तो बताना मैं भूल ही गया था, ” उस दिन 20 सितम्बर 2008 को यह दोनों गिनीज़ बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज़ करवाने को लँदन बुलाये गये थे । वैभव क्यों पीछे रहें, ” तो तो इनका नाम वहाँ नोट हो गया ? ” हाँ भाई, यह फोटो उसी वक्त की तो है ।
बच्चों के चेहरे खिल उठे, एक नयी जानकारी उनके हाथ जो लग गयी थी ! लौटते हुये निखिल जी उनको समझा रहे थे, वर्ल्ड रिकार्ड का मतलब विश्व कीर्तिमान.. मतलब उनके टक्कर का कोई नहीं, समझे ?
| Print article | This entry was posted by अचपन जी on September 6, 2009 at 7:51 pm, and is filed under तुम्हारे सवाल, तुम्हें मालूम है... Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |



about 2 years ago
चेहरा तो हमारा भी खिल उठा..एक नयी जानकारी हाथ जो लग गयी है.
about 2 years ago
मजेदार,जायकेदार !
about 2 years ago
चित्र तो पहले भी देखा था। पर इस तरह जानकारी का विस्तार पा कर वाकई हम भी खिल उठे। सोच रहे हैं कि पैनक्रातोवा की बगल में खड़े हो कर हम कैसे लगेंगे।
about 2 years ago
ये दौलत भी ले लो,ये शोहरत भी ले लो,
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी…
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन,
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी…
about 2 years ago
जानकारी तो ये पहले भी थी.. पर आपने जिस रोचक अंदाज़ में लिखा.. मजा आ गया.. आपका ब्लॉग तो मेरे बच्चो को गिफ्ट करूँगा.. मेरी मेहनत तोबच ही जायेगी..
about 2 years ago
टेक्नीकल इस्टमेन पिक्चर है जी
about 2 years ago
एक अच्छी अलग सी पोस्ट। चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
about 2 years ago
इष्ट मित्रों एवम कुटुंब जनों सहित आपको दशहरे की घणी रामराम.