तुम्हारे सवाल
पिंगपिंग की अनोखी सहेली
Sep 6th
हुआ यह कि एक दिन जया की शैतानियों पर मुझे प्यार आ गया, ” देखो तो छटँकी कैसी हरकतें कर रही है ? ” निखिल को मौज़ आ गयी, ” छटँकी क्यों कहा, अँकल ?” मैं उनको इस विषय पर शह नहीं देना चाहता था, सो टाल गया, ” देखो फ़िफ़्थ में पहुँच गयी, और अभी भी इत्ती सी है !” लेकिन आज उसका जैसे दिन ही ख़राब था । जिसको कि तुम बच्चा-पार्टी कहते हो कि, ” आज तो मेरा लक ही ख़राब है । ” मैंने चिढ़ाया ! यह सुनते ही परम विद्वान, महाज्ञानी चुगलखोर महाराज श्री वैभव जी तुरँत लपक पड़े,
” औः और.. और क्या, ठीक तो कहते हैं, अचपन जी । लक वक कुच्छ नहीं होता है । मम्मी दूध का गिलास लिये इसके पीछे पीछॆ घूमती रहती हैं, तब जाकर यह दूध पीती है । औः औह… उसमें से भी इत्ता सारा दूध मेरे गिलास में डाल देती है । ” मैंनें अपना ढेर सारा मुँह लटका कर कहा, ” यह गलत बात है, जया । इससे तो तुम इत्ती की इत्ती रह जाओगी । ताकत के किये और बढ़ने के लिये तो यह सब ज़रूरी है, न भाई ? ” अब तो वैभव गुरु More >
काल-कलौटी..
Jul 1st
" निखिल भैआ, आ गये अचपन जी ? " कुछ सुनी-सुनी सी आवाज है, मैं सतर्क होता हूँ ।
दुबारा से " निखिल भैआ, आ गये अचपन जी ? " एक बार फिर दोहराया गया । अरे, ये तो अपना वैभव है, बहुत दिन बाद इनकी आवाज़ सुन रहा हूं । " नहीं बेटा, देखो शायद आज रात तक आ जाये । " बेचारे निराश हो गये, बोले तो कुछ भी नहीं, लेकिन बड़ी अदा से अपने दोनों कंधें नीचे झुका कर झटके,और बेचारगी से हल्की बारिश से गीली हो गई अपनी कामचलताऊ क्रिकेट पिच को देखते रहे । मुझे कौतुक हुआ," क्या बोर हो रहे हो ?" ज़नाब जोधा के अकबर भाई जूनियर ऋतिक रोशन जी ने एक लम्बाऽऽ सा आलाप लिया, " हां ऽऽऽ, हो तो रहे हैं । "
फिर खिसियाहट में पलट कर गुस्से से बोले, " .. और हाप्प भी.. हापने भी तो, " फिर ढेर सारा थूक गटक कर पूरी सावधानी बरतते हुए उल्टे अपना आरोप जड़ डाला, " आपने भी तो इत्ते दिन से कुछ भी मजा नहीं लगाया ! "
जया ने कुछ मान से पीछे से पुकारा, " बउआ आओ चलें.. कोई फायदा थोड़े ही ना है, यह तो जबरदस्ती से हमारे मैच में थर्ड अम्पायर More >


